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mahabharat 5.160.21: भरत! उस बिल्ली को बड़े गर्व के साथ महान् कर्म करते देखकर उसके मन में यह विचार उत्पन्न हुआ।   |   mahabharat अध्याय 5.160: दुर्योधनका उलूकको दूत बनाकर पाण्डवोंके पास भेजना और उनसे कहनेके लिये संदेश देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 160: दुर्योधनका उलूकको दूत बनाकर पाण्डवोंके पास भेजना और उनसे कहनेके लिये संदेश देना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  5.160.21 
कार्येण महता युक्तं दम्भयुक्तेन भारत।
तेषां मतिरियं राजन्नासीत् तत्र विनिश्चये॥ २१॥
 
 
अनुवाद
भरत! उस बिल्ली को बड़े गर्व के साथ महान् कर्म करते देखकर उसके मन में यह विचार उत्पन्न हुआ।
 
Bharata! Seeing that cat engaged in the performance of great deeds with great pride, this thought arose in his mind.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)