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mahabharat 5.160.13: हे भारत! तुम्हारा कल्याण हो। सुना है कि पूर्वकाल में जब देवताओं ने प्रह्लाद का राज्य छीन लिया था, तब उन्होंने यह श्लोक गाया था॥13॥   |   mahabharat अध्याय 5.160: दुर्योधनका उलूकको दूत बनाकर पाण्डवोंके पास भेजना और उनसे कहनेके लिये संदेश देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.160.13 
श्रूयते हि पुरा गीत: श्लोकोऽयं भरतर्षभ।
प्रह्रादेनाथ भद्रं ते हृते राज्ये तु दैवतै:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
हे भारत! तुम्हारा कल्याण हो। सुना है कि पूर्वकाल में जब देवताओं ने प्रह्लाद का राज्य छीन लिया था, तब उन्होंने यह श्लोक गाया था॥13॥
 
Bhaarat's best! May you prosper. It is heard that in the past when the gods had snatched away Prahlada's kingdom, he had sung this verse.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)