Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.160.107: धनंजय! यदि झूठी प्रशंसा करने से अभीष्ट कार्य सिद्ध हो जाता, तो सभी को सफलता मिल जाती; क्योंकि कौन इतना दरिद्र और दुर्बल है कि कथा-कहानियाँ गढ़े?॥107॥ | mahabharat अध्याय 5.160: दुर्योधनका उलूकको दूत बनाकर पाण्डवोंके पास भेजना और उनसे कहनेके लिये संदेश देना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यदीदं कत्थनाल्लोके सिध्येत् कर्म धनंजय।
सर्वे भवेयु: सिद्धार्था: कत्थने को हि दुर्गत:॥ १०७॥
अनुवाद
धनंजय! यदि झूठी प्रशंसा करने से अभीष्ट कार्य सिद्ध हो जाता, तो सभी को सफलता मिल जाती; क्योंकि कौन इतना दरिद्र और दुर्बल है कि कथा-कहानियाँ गढ़े?॥107॥
Dhananjaya! If the desired work could be accomplished by praising oneself falsely, then everyone would have achieved success; because who would be poor and weak enough to make up stories?॥ 107॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥