Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.160.105: ‘भरत! हम भलीभाँति जानते हैं कि तुम्हारे पास अक्षय बाणों से भरे हुए दो तरकश हैं, अग्निदेव का दिया हुआ एक दिव्य रथ है और युद्ध के समय उस पर लहराती हुई एक दिव्य ध्वजा है॥105॥ | mahabharat अध्याय 5.160: दुर्योधनका उलूकको दूत बनाकर पाण्डवोंके पास भेजना और उनसे कहनेके लिये संदेश देना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अक्षय्याविषुधी चैव अग्निदत्तं च ते रथम्।
जानीमो हि रणे पार्थ केतुं दिव्यं च भारत॥ १०५॥
अनुवाद
‘भरत! हम भलीभाँति जानते हैं कि तुम्हारे पास अक्षय बाणों से भरे हुए दो तरकश हैं, अग्निदेव का दिया हुआ एक दिव्य रथ है और युद्ध के समय उस पर लहराती हुई एक दिव्य ध्वजा है॥105॥
‘Bharata! We know very well that you have two quivers filled with inexhaustible arrows, a divine chariot given by Agnidev and a divine flag flutters on it during the war.॥ 105॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥