श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 159: धृतराष्ट्र और संजयका संवाद  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  5.159.15 
केचिदीश्वरनिर्दिष्टा: केचिदेव यदृच्छया।
पूर्वकर्मभिरप्यन्ये त्रैधमेतत् प्रदृश्यते।
तस्मादनर्थमापन्न: स्थिरो भूत्वा निशामय॥ १५॥
 
 
अनुवाद
कुछ लोग भगवान की प्रेरणा से कर्म करते हैं, कुछ लोग किसी आकस्मिक संयोगवश कर्म में प्रवृत्त होते हैं और बहुत से लोग अपने पूर्वकर्मों की प्रेरणा से कर्म करते हैं। इस प्रकार कर्म की तीन प्रकार की अवस्थाएँ देखी जाती हैं। अतः इस महान् संकट में पड़े हुए, शान्त मन से तुम्हें सम्पूर्ण कथा सुननी चाहिए॥ 15॥
 
Some people work under the inspiration of God, some people are involved in work due to some accidental coincidence and many others work under the inspiration of their past deeds. In this way, three types of states of work are seen. Therefore, being in this great crisis, you should listen to the whole story with a calm mind.॥ 15॥
 
इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि सैन्यनिर्याणपर्वणि संजयवाक्ये एकोनषष्टॺधिकशततमोऽध्याय:॥ १५९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत सैन्यनिर्याणपर्वमें संजयवाक्यविषयक एक सौ उनसठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १५९॥

 
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