श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 159: धृतराष्ट्र और संजयका संवाद  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  5.159.1 
जनमेजय उवाच
तथा व्यूढेष्वनीकेषु कुरुक्षेत्रे द्विजर्षभ।
किमकुर्वंश्च कुरव: कालेनाभिप्रचोदिता:॥ १॥
 
 
अनुवाद
जनमेजय ने पूछा - हे ब्राह्मणश्रेष्ठ! जब सेनाएँ कुरुक्षेत्र में युद्ध के लिए पंक्तिबद्ध हो गईं, तब काल से प्रेरित होकर कौरवों ने क्या किया?॥1॥
 
Janamejaya asked - O best of Brahmins! When the armies had thus lined up in battle formation on the Kurukshetra, what did the Kauravas, inspired by time, do?॥1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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