श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 157: युधिष्ठिरके द्वारा अपने सेनापतियोंका अभिषेक, यदुवंशियोंसहित बलरामजीका आगमन तथा पाण्डवोंसे विदा लेकर उनका तीर्थयात्राके लिये प्रस्थान  »  श्लोक 6-7h
 
 
श्लोक  5.157.6-7h 
वैशम्पायन उवाच
आपद्धर्मार्थकुशलो महाबुद्धिर्युधिष्ठिर:।
सर्वान् भ्रातॄन् समानीय वासुदेवं च शाश्वतम्॥ ६॥
उवाच वदतां श्रेष्ठ: सान्त्वपूर्वमिदं वच:।
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी बोले - राजन् ! उस समय आपद्धर्म के विषय में कुशल, वक्ताओं में श्रेष्ठ, परम बुद्धिमान युधिष्ठिर ने सब भाइयों को तथा सनातन भगवान वासुदेव को बुलाकर सान्त्वनापूर्वक इस प्रकार कहा - 6 1/2॥
 
Vaishampayanji said – King! At that time, Yudhishthira, skilled in the matters of Apadharma, the best of speakers, the most intelligent, called all the brothers and the eternal Lord Vasudev and said consolingly thus - 6 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)