श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 156: दुर्योधनके द्वारा भीष्मजीका प्रधान सेनापतिके पदपर अभिषेक और कुरुक्षेत्रमें पहुँचकर शिविर-निर्माण  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  5.156.3 
न हि जातु द्वयोर्बुद्धि: समा भवति कर्हिचित्।
शौर्यं च बलनेतॄणां स्पर्धते च परस्परम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
‘दो पुरुषों की बुद्धि कभी एक समान नहीं होती। यदि दोनों ओर योग्य सेनापति हों, तो परस्पर प्रतिस्पर्धा करने पर उनकी वीरता बढ़ जाती है।॥3॥
 
‘The intelligence of two men is never the same. If there are able commanders on both sides, then their bravery increases in competition with each other.॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)