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mahabharat 5.156.20: मैं भी यदि चाहूँ तो अर्जुन की तरह देवता, मनुष्य, दानव और राक्षसों सहित इस सम्पूर्ण जगत को अपने अस्त्रों के बल से क्षण भर में ही निष्प्राण कर सकता हूँ॥20॥   |   mahabharat अध्याय 5.156: दुर्योधनके द्वारा भीष्मजीका प्रधान सेनापतिके पदपर अभिषेक और कुरुक्षेत्रमें पहुँचकर शिविर-निर्माण   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 156: दुर्योधनके द्वारा भीष्मजीका प्रधान सेनापतिके पदपर अभिषेक और कुरुक्षेत्रमें पहुँचकर शिविर-निर्माण  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  5.156.20 
अहं चैव क्षणेनैव निर्मनुष्यमिदं जगत्।
कुर्यां शस्त्रबलेनैव ससुरासुरराक्षसम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
मैं भी यदि चाहूँ तो अर्जुन की तरह देवता, मनुष्य, दानव और राक्षसों सहित इस सम्पूर्ण जगत को अपने अस्त्रों के बल से क्षण भर में ही निष्प्राण कर सकता हूँ॥20॥
 
Like Arjun, if I also wish, I can make this entire world including gods, humans, demons and demons lifeless in a moment with the power of my weapons. 20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)