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mahabharat 5.156.1: वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! तत्पश्चात धृतराष्ट्रपुत्र दुर्योधन समस्त राजाओं के साथ शान्तनुपुत्र भीष्म के पास गया और हाथ जोड़कर इस प्रकार बोला -॥1॥   |   mahabharat अध्याय 5.156: दुर्योधनके द्वारा भीष्मजीका प्रधान सेनापतिके पदपर अभिषेक और कुरुक्षेत्रमें पहुँचकर शिविर-निर्माण   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 156: दुर्योधनके द्वारा भीष्मजीका प्रधान सेनापतिके पदपर अभिषेक और कुरुक्षेत्रमें पहुँचकर शिविर-निर्माण  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  5.156.1 
वैशम्पायन उवाच
तत: शान्तनवं भीष्मं प्राञ्जलिर्धृतराष्ट्रज:।
सह सर्वैर्महीपालैरिदं वचनमब्रवीत्॥ १॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! तत्पश्चात धृतराष्ट्रपुत्र दुर्योधन समस्त राजाओं के साथ शान्तनुपुत्र भीष्म के पास गया और हाथ जोड़कर इस प्रकार बोला -॥1॥
 
Vaishmpayana says - Janamejaya! Thereafter Duryodhana, son of Dhritarashtra, along with all the kings, went to Shantanu's son Bhishma and spoke with folded hands like this -॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)