श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 154: युधिष्ठिरका भगवान‍् श्रीकृष्णसे अपने समयोचित कर्तव्यके विषयमें पूछना, भगवान‍्का युद्धको ही कर्तव्य बताना तथा इस विषयमें युधिष्ठिरका संताप और अर्जुनद्वारा श्रीकृष्णके वचनोंका समर्थन  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  5.154.8 
न च भीष्मस्य दुर्मेधा: शृणोति विदुरस्य वा।
मम वा भाषितं किंचित् सर्वमेवातिवर्तते॥ ८॥
 
 
अनुवाद
वह दुष्ट मनुष्य, जिसकी बुद्धि भ्रष्ट है, न तो भीष्म की बात सुनता है, न विदुर की, न मेरी। वह सबकी बातों की उपेक्षा करता है।
 
That wicked person with a wrong intellect does not listen to Bhishma, Vidura or me. He ignores everyone's words. 8.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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