श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 154: युधिष्ठिरका भगवान‍् श्रीकृष्णसे अपने समयोचित कर्तव्यके विषयमें पूछना, भगवान‍्का युद्धको ही कर्तव्य बताना तथा इस विषयमें युधिष्ठिरका संताप और अर्जुनद्वारा श्रीकृष्णके वचनोंका समर्थन  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  5.154.7 
कृष्ण उवाच
उक्तवानस्मि यद् वाक्यं धर्मार्थसहितं हितम्।
न तु तन्निकृतिप्रज्ञे कौरव्ये प्रतितिष्ठति॥ ७॥
 
 
अनुवाद
श्रीकृष्ण बोले - मैंने जो धर्म और अर्थ पर आधारित हितकर उपदेश कहा है, वह केवल छल-कपट में कुशल दुर्योधन के मन में नहीं बैठता।
 
Shri Krishna said - The beneficial advice that I have said, which is based on Dharma and Artha, does not sit in the mind of Duryodhan, who is skilled only in deceit and fraud. 7.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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