श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 154: युधिष्ठिरका भगवान‍् श्रीकृष्णसे अपने समयोचित कर्तव्यके विषयमें पूछना, भगवान‍्का युद्धको ही कर्तव्य बताना तथा इस विषयमें युधिष्ठिरका संताप और अर्जुनद्वारा श्रीकृष्णके वचनोंका समर्थन  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  5.154.6 
श्रुत्वैतद् धर्मराजस्य धर्मार्थसहितं वच:।
मेघदुन्दुभिनिर्घोष: कृष्णो वाक्यमथाब्रवीत्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
धर्मराज के धर्म और अर्थ से परिपूर्ण ये वचन सुनकर भगवान श्रीकृष्ण ने मेघ और डमरू के समान गम्भीर वाणी में यह कहा॥6॥
 
Hearing these words of Dharmaraja, which were full of Dharma and meaning, Lord Krishna said this in a voice as deep as that of a cloud and a drum. ॥ 6॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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