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श्लोक 5.154.4  |
विदुरस्यापि तद् वाक्यं श्रुतं भीष्मस्य चोभयो:।
कुन्त्याश्च विपुलप्रज्ञ प्रज्ञा कात्स्न्र्येन ते श्रुता॥ ४॥ |
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| अनुवाद |
| विदुर और भीष्मजी ने जो कहा है, वह भी तुमने सुन लिया है। हे महामूर्ख! माता कुन्ती के विचार भी तुमने भली-भाँति सुन लिए हैं॥4॥ |
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| ‘You have also heard what Vidura and Bhishmaji have said. O great idiot! You have also fully heard the thoughts of mother Kunti.॥ 4॥ |
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