श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 154: युधिष्ठिरका भगवान‍् श्रीकृष्णसे अपने समयोचित कर्तव्यके विषयमें पूछना, भगवान‍्का युद्धको ही कर्तव्य बताना तथा इस विषयमें युधिष्ठिरका संताप और अर्जुनद्वारा श्रीकृष्णके वचनोंका समर्थन  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  5.154.23 
तच्छ्रुत्वा धर्मराजस्य सव्यसाची परंतप:।
यदुक्तं वासुदेवेन श्रावयामास तद् वच:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
धर्मराज के ये वचन सुनकर शत्रुओं को पीड़ा देने वाले अर्जुन ने भगवान श्रीकृष्ण की कही हुई बात उनसे कही॥ 23॥
 
On hearing these words of Dharmaraja, Arjuna, the tormentor of enemies, related to him what Lord Krishna had said.॥ 23॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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