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श्लोक 5.154.21  |
तस्मिन् यत्न: कृतोऽस्माभि: स नो हीन: प्रयत्नत:।
अकृते तु प्रयत्नेऽस्मानुपावृत्त: कलिर्महान्॥ २१॥ |
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| अनुवाद |
| यद्यपि हमने उसे टालने का हर प्रकार से प्रयत्न किया, फिर भी हमारा प्रयत्न उसे टाल न सका और जिस महान् संघर्ष के लिए कोई प्रयत्न नहीं किया गया था, वह स्वतः ही हम पर आ पड़ा॥ 21॥ |
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| Although we made every effort to avert it, yet our efforts could not avert it, and the great strife for which no effort was made, automatically fell upon us.॥ 21॥ |
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