श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 154: युधिष्ठिरका भगवान‍् श्रीकृष्णसे अपने समयोचित कर्तव्यके विषयमें पूछना, भगवान‍्का युद्धको ही कर्तव्य बताना तथा इस विषयमें युधिष्ठिरका संताप और अर्जुनद्वारा श्रीकृष्णके वचनोंका समर्थन  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  5.154.2 
अस्मिन्नभ्यागते काले किं च न: क्षममच्युत।
कथं च वर्तमाना वै स्वधर्मान्न च्यवेमहि॥ २॥
 
 
अनुवाद
अच्युत! इस समय हमें क्या करना उचित है? हमें कैसा आचरण करना चाहिए? जिससे हम अपने धर्म से च्युत न हों॥ 2॥
 
‘Achyuta! What is right for us to do in this present time? How should we behave? So that we do not fall from our Dharma.॥ 2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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