श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 154: युधिष्ठिरका भगवान‍् श्रीकृष्णसे अपने समयोचित कर्तव्यके विषयमें पूछना, भगवान‍्का युद्धको ही कर्तव्य बताना तथा इस विषयमें युधिष्ठिरका संताप और अर्जुनद्वारा श्रीकृष्णके वचनोंका समर्थन  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  5.154.14 
पार्थिवेषु न सर्वेषु य इमे तव सैनिका:।
यत् पापं यन्नकल्याणं सर्वं तस्मिन् प्रतिष्ठितम्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
आपकी सेना में जितने भी राजा हैं, उनमें से केवल दुर्योधन ही पाप और दुष्टात्मा से मुक्त है ॥14॥
 
Of all the kings in your army, the only one who is free from sin and evil spirit is Duryodhana alone. ॥ 14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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