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श्लोक 5.154.13  |
किं च तेन मयोक्तेन यान्यभाषत कौरव:।
संक्षेपेण दुरात्मासौ न युक्तं त्वयि वर्तते॥ १३॥ |
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| अनुवाद |
| जो कुछ उन लोगों ने कहा, उसे यहाँ दोहराने से क्या लाभ? केवल इतना ही समझ लो कि वह दुष्टचित्त कौरव तुम्हारे प्रति न्यायपूर्ण व्यवहार नहीं कर रहा है॥13॥ |
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| What is the use of repeating here whatever those people said? Just understand this in brief that that evil-minded Kaurava is not behaving justly towards you.॥ 13॥ |
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