श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 154: युधिष्ठिरका भगवान‍् श्रीकृष्णसे अपने समयोचित कर्तव्यके विषयमें पूछना, भगवान‍्का युद्धको ही कर्तव्य बताना तथा इस विषयमें युधिष्ठिरका संताप और अर्जुनद्वारा श्रीकृष्णके वचनोंका समर्थन  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  5.154.12 
शकुनि: सौबलश्चैव कर्णदु:शासनावपि।
त्वय्ययुक्तान्यभाषन्त मूढा मूढममर्षणम्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
शकुनि, कर्ण और दु:शासन, इन तीनों मूर्खों ने मूर्ख और असहिष्णु दुर्योधन से तुम्हारे विषय में बहुत सी अनुचित बातें कही थीं।
 
Shakuni, Karna and Dushasan, the three fools, had said many inappropriate things about you to the stupid and intolerant Duryodhana.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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