श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 154: युधिष्ठिरका भगवान‍् श्रीकृष्णसे अपने समयोचित कर्तव्यके विषयमें पूछना, भगवान‍्का युद्धको ही कर्तव्य बताना तथा इस विषयमें युधिष्ठिरका संताप और अर्जुनद्वारा श्रीकृष्णके वचनोंका समर्थन  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  5.154.11 
न च भीष्मो न च द्रोणो युक्तं तत्राहतुर्वच:।
सर्वे तमनुवर्तन्ते ऋते विदुरमच्युत॥ ११॥
 
 
अनुवाद
अच्युत! वहाँ तो भीष्म और द्रोणाचार्य भी हमेशा सही बात नहीं कहते। विदुर को छोड़कर बाकी सब दुर्योधन का अनुसरण करते हैं।
 
Achyuta! There, even Bhishma and Dronacharya do not always say the right thing. Except Vidur, everyone else follows Duryodhan.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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