अकृतेनैव कार्येण गत: पार्थानधोक्षज:।
स एनान्मन्युनाऽऽविष्टो ध्रुवं धक्ष्यत्यसंशयम्॥ ९॥
अनुवाद
श्रीकृष्ण अपना कार्य पूरा करके यहाँ से नहीं गए हैं। इसके लिए वे क्रोध में आकर पाण्डवों को अवश्य ही युद्ध के लिए उकसाएँगे, इसमें तनिक भी संदेह नहीं है॥9॥
Sri Krishna has not gone from here having accomplished his task. For this he will certainly provoke the Pandavas to a war in anger, there is no doubt about it at all.॥ 9॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥