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mahabharat 5.153.17-18h: आज ही घोषणा कर देनी चाहिए कि कल प्रातःकाल हमें युद्ध के लिए प्रस्थान करना है। इसमें विलम्ब नहीं करना चाहिए।’ दुर्योधन की यह आज्ञा सुनकर, ‘बहुत अच्छा - ऐसा ही होगा’ और यह प्रतिज्ञा करके महामना कर्ण आदि महापुरुष अत्यन्त प्रसन्न हुए और प्रातःकाल होते ही वे राजाओं के निवास के लिए शिविर बनाने लगे॥17 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 5.153: दुर्योधनका सेनाको सुसज्जित होने और शिविर-निर्माण करनेके लिये आज्ञा देना तथा सैनिकोंकी रणयात्राके लिये तैयारी   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 153: दुर्योधनका सेनाको सुसज्जित होने और शिविर-निर्माण करनेके लिये आज्ञा देना तथा सैनिकोंकी रणयात्राके लिये तैयारी  »  श्लोक 17-18h
 
 
श्लोक  5.153.17-18h 
प्रयाणं घुष्यतामद्य श्वोभूत इति मा चिरम्।
ते तथेति प्रतिज्ञाय श्वोभूते चक्रिरे तथा॥ १७॥
हृष्टरूपा महात्मानो निवासाय महीक्षिताम्।
 
 
अनुवाद
आज ही घोषणा कर देनी चाहिए कि कल प्रातःकाल हमें युद्ध के लिए प्रस्थान करना है। इसमें विलम्ब नहीं करना चाहिए।’ दुर्योधन की यह आज्ञा सुनकर, ‘बहुत अच्छा - ऐसा ही होगा’ और यह प्रतिज्ञा करके महामना कर्ण आदि महापुरुष अत्यन्त प्रसन्न हुए और प्रातःकाल होते ही वे राजाओं के निवास के लिए शिविर बनाने लगे॥17 1/2॥
 
It should be announced today that we have to set out for the war tomorrow morning. There should be no delay in this.' On hearing this order from Duryodhan, 'Very good - it will happen' and taking this vow, Mahamana Karna and others became very happy and as soon as the morning dawned, they started making camps for the residence of the kings.॥ 17 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)