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श्लोक 5.15.9  |
इन्द्राण्युवाच
यो मे कृतस्त्वया कालस्तमाकाङ्क्षे जगत्पते।
ततस्त्वमेव भर्ता मे भविष्यसि सुराधिप॥ ९॥ |
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| अनुवाद |
| इन्द्राणी बोली - जगत्पते ! मैं आपसे जो शर्त रखी है, उसे पूरा करना चाहती हूँ। सुरेश्वर ! तब आप मेरे पति होंगे ॥9॥ |
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| Indrani said - Jagatpate! I want to fulfill the condition that I have made with you. Sureshwar! Then you will be my husband.॥ 9॥ |
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