श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 15: इन्द्रकी आज्ञासे इन्द्राणीके अनुरोधपर नहुषका ऋषियोंको अपना वाहन बनाना तथा बृहस्पति और अग्निका संवाद  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  5.15.8 
न च व्रीडा त्वया कार्या सुश्रोणि मयि विश्वसे:।
सत्येन वै शपे देवि करिष्ये वचनं तव॥ ८॥
 
 
अनुवाद
'सुश्रोणि! तुम्हें मुझसे लज्जित नहीं होना चाहिए। मुझ पर विश्वास रखो। देवि! मैं सत्य की शपथ खाकर कहता हूँ कि मैं तुम्हारी प्रत्येक आज्ञा का पालन करूँगा।'॥8॥
 
‘Sushroni! You should not be ashamed of me. Trust me. Devi! I swear by the truth that I will obey your every command.'॥ 8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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