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mahabharat 5.15.6: उन्हें देखकर नहुष ने मुस्कुराकर इस प्रकार कहा- 'वरारोहे! आपका स्वागत है। शुचिस्मिते! कहिए, मैं आपकी क्या सेवा कर सकता हूँ?॥6॥   |   mahabharat अध्याय 5.15: इन्द्रकी आज्ञासे इन्द्राणीके अनुरोधपर नहुषका ऋषियोंको अपना वाहन बनाना तथा बृहस्पति और अग्निका संवाद   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 15: इन्द्रकी आज्ञासे इन्द्राणीके अनुरोधपर नहुषका ऋषियोंको अपना वाहन बनाना तथा बृहस्पति और अग्निका संवाद  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  5.15.6 
नहुषस्तां ततो दृष्ट्वा सस्मितो वाक्यमब्रवीत्।
स्वागतं ते वरारोहे किं करोमि शुचिस्मिते॥ ६॥
 
 
अनुवाद
उन्हें देखकर नहुष ने मुस्कुराकर इस प्रकार कहा- 'वरारोहे! आपका स्वागत है। शुचिस्मिते! कहिए, मैं आपकी क्या सेवा कर सकता हूँ?॥6॥
 
Seeing them Nahusha smiled and said thus- 'Vararohe! You are welcome. Shuchismite! Tell me, what service can I do for you?॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)