|
| |
| |
श्लोक 5.15.6  |
नहुषस्तां ततो दृष्ट्वा सस्मितो वाक्यमब्रवीत्।
स्वागतं ते वरारोहे किं करोमि शुचिस्मिते॥ ६॥ |
| |
| |
| अनुवाद |
| उन्हें देखकर नहुष ने मुस्कुराकर इस प्रकार कहा- 'वरारोहे! आपका स्वागत है। शुचिस्मिते! कहिए, मैं आपकी क्या सेवा कर सकता हूँ?॥6॥ |
| |
| Seeing them Nahusha smiled and said thus- 'Vararohe! You are welcome. Shuchismite! Tell me, what service can I do for you?॥ 6॥ |
| ✨ ai-generated |
| |
|