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mahabharat 5.15.33: अग्निदेव बोले - मैं जल में प्रवेश नहीं कर सकूँगा; क्योंकि मैं उसमें नष्ट हो जाऊँगा। हे महाबली बृहस्पति! मैं आपकी शरण में आया हूँ। आप कृपा करें (मुझे जल में जाने को न कहें)॥33॥   |   mahabharat अध्याय 5.15: इन्द्रकी आज्ञासे इन्द्राणीके अनुरोधपर नहुषका ऋषियोंको अपना वाहन बनाना तथा बृहस्पति और अग्निका संवाद   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 15: इन्द्रकी आज्ञासे इन्द्राणीके अनुरोधपर नहुषका ऋषियोंको अपना वाहन बनाना तथा बृहस्पति और अग्निका संवाद  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  5.15.33 
अग्निरुवाच
नाप: प्रवेष्टुं शक्ष्यामि क्षयो मेऽत्र भविष्यति।
शरणं त्वां प्रपन्नोऽस्मि स्वस्ति तेऽस्तु महाद्युते॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
अग्निदेव बोले - मैं जल में प्रवेश नहीं कर सकूँगा; क्योंकि मैं उसमें नष्ट हो जाऊँगा। हे महाबली बृहस्पति! मैं आपकी शरण में आया हूँ। आप कृपा करें (मुझे जल में जाने को न कहें)॥33॥
 
Agnidev said - I will not be able to enter the water; because I will be destroyed in it. O mighty Brihaspati! I have come to your refuge. May you be blessed (do not ask me to go into the water).॥ 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)