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mahabharat 5.15.17: जो पुरुष मुनियों को भी अपना वाहन बना लेता है, उसमें बल की कमी नहीं होती। मैं तपस्वी, बलवान और भूत, वर्तमान और भविष्य तीनों कालों का स्वामी हूँ॥ 17॥   |   mahabharat अध्याय 5.15: इन्द्रकी आज्ञासे इन्द्राणीके अनुरोधपर नहुषका ऋषियोंको अपना वाहन बनाना तथा बृहस्पति और अग्निका संवाद   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 15: इन्द्रकी आज्ञासे इन्द्राणीके अनुरोधपर नहुषका ऋषियोंको अपना वाहन बनाना तथा बृहस्पति और अग्निका संवाद  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  5.15.17 
न ह्यल्पवीर्यो भवति यो वाहान् कुरुते मुनीन्।
अहं तपस्वी बलवान् भूतभव्यभवत्प्रभु:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
जो पुरुष मुनियों को भी अपना वाहन बना लेता है, उसमें बल की कमी नहीं होती। मैं तपस्वी, बलवान और भूत, वर्तमान और भविष्य तीनों कालों का स्वामी हूँ॥ 17॥
 
A man who can make even sages his vehicle, does not lack power. I am an ascetic, powerful and the master of all three time periods - past, present and future.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)