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एवं वदान्यो धर्मज्ञ: सत्यसंधश्च सोऽभवत्।
प्रिय: प्रजानामपि संस्त्वग्दोषेण प्रदूषित:॥ २४॥
अनुवाद
इस प्रकार यद्यपि देवापि उदार, धार्मिक, सत्यवादी और प्रजाप्रिय थे, तथापि पूर्वोक्त चर्मरोग के कारण वे दूषित माने जाते थे ॥24॥
In this way, although Devapi was generous, religious, truthful and beloved by the people, yet he was considered contaminated due to the aforesaid skin disease. 24॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥