श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 144: विदुरकी बात सुनकर युद्धके भावी दुष्परिणामसे व्यथित हुई कुन्तीका बहुत सोच-विचारके बाद कर्णके पास जाना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  5.144.6 
जयद्रथस्य कर्णस्य तथा दु:शासनस्य च।
सौबलस्य च दुर्बुद्धॺा मिथो भेद: प्रपत्स्यते॥ ६॥
 
 
अनुवाद
जयद्रथ, कर्ण, दुःशासन और शकुनिकी की मिथ्या बुद्धि के कारण कौरवों और पांडवों में फूट पड़ जायेगी।
 
Because of the false intelligence of Jayadratha, Karna, Dushasan and Shakuniki, there will be division among the Kauravas and Pandavas.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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