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mahabharat 5.144.27: गंगा तट पर पहुँचकर कुन्ती ने अपने दयालु एवं सत्यनिष्ठ पुत्र कर्ण के मुख से वेदपाठ की गम्भीर ध्वनि सुनी॥27॥   |   mahabharat अध्याय 5.144: विदुरकी बात सुनकर युद्धके भावी दुष्परिणामसे व्यथित हुई कुन्तीका बहुत सोच-विचारके बाद कर्णके पास जाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 144: विदुरकी बात सुनकर युद्धके भावी दुष्परिणामसे व्यथित हुई कुन्तीका बहुत सोच-विचारके बाद कर्णके पास जाना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  5.144.27 
आत्मजस्य ततस्तस्य घृणिन: सत्यसङ्गिन:।
गङ्गातीरे पृथाश्रौषीद् वेदाध्ययननि:स्वनम्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
गंगा तट पर पहुँचकर कुन्ती ने अपने दयालु एवं सत्यनिष्ठ पुत्र कर्ण के मुख से वेदपाठ की गम्भीर ध्वनि सुनी॥27॥
 
After reaching the banks of Ganga, Kunti heard the solemn sound of recitation of Vedas from the mouth of her kind and truthful son Karna. 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)