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mahabharat 5.144.25: मैंने अपने गर्भ में अपने बालक को पुत्र के समान पाला है। फिर भी कर्ण अपने भाइयों के हित के लिए मेरी हितकारी सलाह क्यों नहीं मानेगा?॥25॥   |   mahabharat अध्याय 5.144: विदुरकी बात सुनकर युद्धके भावी दुष्परिणामसे व्यथित हुई कुन्तीका बहुत सोच-विचारके बाद कर्णके पास जाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 144: विदुरकी बात सुनकर युद्धके भावी दुष्परिणामसे व्यथित हुई कुन्तीका बहुत सोच-विचारके बाद कर्णके पास जाना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  5.144.25 
योऽसौ कानीनगर्भो मे पुत्रवत् परिरक्षित:।
कस्मान्न कुर्याद् वचनं पथ्यं भ्रातृहितं तथा॥ २५॥
 
 
अनुवाद
मैंने अपने गर्भ में अपने बालक को पुत्र के समान पाला है। फिर भी कर्ण अपने भाइयों के हित के लिए मेरी हितकारी सलाह क्यों नहीं मानेगा?॥25॥
 
I have raised my child like a son in my womb. Why will Karna not listen to my beneficial advice for the welfare of his brothers?'॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)