Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 5.144.22: अपने स्त्रैण स्वभाव और बाल्यावस्था के कारण मैं बार-बार इस प्रश्न को लेकर चिंतित रहती थी। उन दिनों एक विश्वसनीय नर्स मेरी रक्षा करती थी और मेरी सखियाँ सदैव मुझे घेरे रहती थीं।'॥22॥   |   mahabharat अध्याय 5.144: विदुरकी बात सुनकर युद्धके भावी दुष्परिणामसे व्यथित हुई कुन्तीका बहुत सोच-विचारके बाद कर्णके पास जाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 144: विदुरकी बात सुनकर युद्धके भावी दुष्परिणामसे व्यथित हुई कुन्तीका बहुत सोच-विचारके बाद कर्णके पास जाना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  5.144.22 
स्त्रीभावाद् बालभावाच्च चिन्तयन्ती पुन: पुन:।
धात्र्या विस्रब्धया गुप्ता सखीजनवृता तदा॥ २२॥
 
 
अनुवाद
अपने स्त्रैण स्वभाव और बाल्यावस्था के कारण मैं बार-बार इस प्रश्न को लेकर चिंतित रहती थी। उन दिनों एक विश्वसनीय नर्स मेरी रक्षा करती थी और मेरी सखियाँ सदैव मुझे घेरे रहती थीं।'॥22॥
 
‘Due to my feminine nature and childhood, I was repeatedly worried about this question. In those days, a trusted nurse protected me and my friends always surrounded me.'॥ 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)