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mahabharat 5.144.16-17h: परन्तु यह एकमात्र कुमार्गगामी कर्ण अपनी माया के कारण सदैव दुष्टबुद्धि दुर्योधन का अनुसरण करता है। इसी कारण यह पापात्मा पाण्डवों से सदैव द्वेष रखता है॥16 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 5.144: विदुरकी बात सुनकर युद्धके भावी दुष्परिणामसे व्यथित हुई कुन्तीका बहुत सोच-विचारके बाद कर्णके पास जाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 144: विदुरकी बात सुनकर युद्धके भावी दुष्परिणामसे व्यथित हुई कुन्तीका बहुत सोच-विचारके बाद कर्णके पास जाना  »  श्लोक 16-17h
 
 
श्लोक  5.144.16-17h 
अयं त्वेको वृथादृष्टिर्धार्तराष्ट्रस्य दुर्मते:॥ १६॥
मोहानुवर्ती सततं पापो द्वेष्टि च पाण्डवान्।
 
 
अनुवाद
परन्तु यह एकमात्र कुमार्गगामी कर्ण अपनी माया के कारण सदैव दुष्टबुद्धि दुर्योधन का अनुसरण करता है। इसी कारण यह पापात्मा पाण्डवों से सदैव द्वेष रखता है॥16 1/2॥
 
‘But this only misguided Karna, due to his delusions, always follows the evil-minded Duryodhan. That is why this sinful soul always hates the Pandavas.॥ 16 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)