श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 144: विदुरकी बात सुनकर युद्धके भावी दुष्परिणामसे व्यथित हुई कुन्तीका बहुत सोच-विचारके बाद कर्णके पास जाना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  5.144.11 
धिगस्त्वर्थं यत्कृतेऽयं महान् ज्ञातिवध: कृत:।
वर्त्स्यते सुहृदां चैव युद्धेऽस्मिन् वै पराभव:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
अहा! इस धन को धिक्कार है, जिसके लिए परस्पर सम्बन्धियों का यह महासंहार किया जा रहा है। इस युद्ध में हमारे सम्बन्धी भी अवश्य ही पराजित होंगे। 11॥
 
Oh! Shame on this wealth, for the sake of which this great massacre of mutual relatives is going to be carried out. Even our relatives will definitely be defeated in this war. 11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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