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mahabharat 5.142.8-9: जब तुम जप और होम में लगे हुए कुन्तीपुत्र युधिष्ठिर को युद्ध में अपनी विशाल सेना की रक्षा करते हुए तथा सूर्य के समान प्रचण्ड होकर शत्रु सेना को परास्त करते हुए देखोगे, उस समय तुम्हें सत्ययुग, त्रेता और द्वापर पर भी विश्वास नहीं होगा ॥8-9॥   |   mahabharat अध्याय 5.142: भगवान‍् श्रीकृष्णका कर्णसे पाण्डवपक्षकी निश्चित विजयका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 142: भगवान‍् श्रीकृष्णका कर्णसे पाण्डवपक्षकी निश्चित विजयका प्रतिपादन  »  श्लोक 8-9
 
 
श्लोक  5.142.8-9 
यदा द्रक्ष्यसि संग्रामे कुन्तीपुत्रं युधिष्ठिरम्।
जपहोमसमायुक्तं स्वां रक्षन्तं महाचमूम्॥ ८॥
आदित्यमिव दुर्धर्षं तपन्तं शत्रुवाहिनीम्।
न तदा भविता त्रेता न कृतं द्वापरं न च॥ ९॥
 
 
अनुवाद
जब तुम जप और होम में लगे हुए कुन्तीपुत्र युधिष्ठिर को युद्ध में अपनी विशाल सेना की रक्षा करते हुए तथा सूर्य के समान प्रचण्ड होकर शत्रु सेना को परास्त करते हुए देखोगे, उस समय तुम्हें सत्ययुग, त्रेता और द्वापर पर भी विश्वास नहीं होगा ॥8-9॥
 
When you will see Kunti's son Yudhishthira, engaged in chanting and home, protecting his huge army in the battle and being fierce like the sun and defeating the enemy's army, at that time you will not believe in Satyayuga, Treta and Dwapara. 8-9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)