श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 141: कर्णका दुर्योधनके पक्षमें रहनेके निश्चित विचारका प्रतिपादन करते हुए समरयज्ञके रूपकका वर्णन करना  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  5.141.40 
इध्मा: परिधयश्चैव शक्तयो विमला गदा:।
सदस्या द्रोणशिष्याश्च कृपस्य च शरद्वत:॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
शुद्ध भाले और गदाएँ चारों ओर बिखरी हुई समिधाएँ होंगी। द्रोण और कृपाचार्य के शिष्य सदस्यों का कर्तव्य निभाएँगे ॥40॥
 
Pure spears and maces will be the samidhaas scattered all around. The disciples of Drona and Krupacharya will perform the duties of the members. ॥ 40॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)