श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 141: कर्णका दुर्योधनके पक्षमें रहनेके निश्चित विचारका प्रतिपादन करते हुए समरयज्ञके रूपकका वर्णन करना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  5.141.20 
मन्त्रस्य नियमं कुर्यास्त्वमत्र मधुसूदन।
एतदत्र हितं मन्ये सर्वं यादवनन्दन॥ २०॥
 
 
अनुवाद
परंतु मधुसूदन! आप मेरे और आपके बीच जो गुप्त मंत्रणा है, उसे यहीं तक सीमित रखें। यादवपुत्र! मैं समझता हूँ कि ऐसा करना सर्वथा लाभदायक है॥ 20॥
 
But Madhusudan! You should limit this secret consultation between you and me to this only. Son of Yadava! I think that doing this is in every way beneficial.॥ 20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)