श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 14: उपश्रुति देवीकी सहायतासे इन्द्राणीकी इन्द्रसे भेंट  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  5.14.9 
तत्र दिव्यानि पद्मानि पञ्चवर्णानि भारत।
षट्पदैरुपगीतानि प्रफुल्लानि सहस्रश:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
भारत! उसके अन्दर सहस्रों कमल खिले हुए थे, जो पाँच रंगों वाले प्रतीत होते थे। भौंरे उन पर मंडराते और गुंजार करते थे॥9॥
 
Bharat! Thousands of lotuses were blooming inside it, which appeared to be of five colours. The bumble bees were hovering over them and humming.॥ 9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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