| श्री महाभारत » पर्व 5: उद्योग पर्व » अध्याय 14: उपश्रुति देवीकी सहायतासे इन्द्राणीकी इन्द्रसे भेंट » श्लोक 18 |
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| | | | श्लोक 5.14.18  | प्रकाशयात्मनाऽऽत्मानं दैत्यदानवसूदन।
तेज: समाप्नुहि विभो देवराज्यं प्रशाधि च॥ १८॥ | | | | | | अनुवाद | | हे दैत्य, दैत्य, वसुदान, हे प्रभु! अब प्रकाश में आओ, तेज प्राप्त करो और देवताओं के राज्य का शासन अपने हाथ में लो।॥18॥ | | | | O demon, demon, Vasudan, Lord! Now bring yourself into the light, attain brilliance and take the rule of the kingdom of the gods in your hands.'॥ 18॥ | | | इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि सेनोद्योगपर्वणि इन्द्राणीन्द्रस्तवे चतुर्दशोऽध्याय:॥ १४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत सेनोद्योगपर्वमें इन्द्राणीद्वारा इन्द्रका स्तुतिविषयक चौदहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १४॥
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