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श्री महाभारत
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पर्व 5: उद्योग पर्व
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अध्याय 139: भीष्मसे वार्तालाप आरम्भ करके द्रोणाचार्यका दुर्योधनको पुन: संधिके लिये समझाना
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श्लोक 18
श्लोक
5.139.18
द्रौपदी यस्य चाशास्ते विजयं सत्यवादिनी।
तपोघोरव्रता देवी कथं जेष्यसि पाण्डवम्॥ १८॥
अनुवाद
जिनकी विजय की कामना तपस्या और कठोर व्रतों का पालन करने वाली सत्यनिष्ठा द्रौपदी करती है, उन पाण्डवपुत्र युधिष्ठिर को तुम कैसे परास्त करोगे?॥18॥
How will you defeat Yudhishthir, the son of Pandava, whose victory is desired by the truthful Draupadi who observes austerity and severe fasts?॥18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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