श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 139: भीष्मसे वार्तालाप आरम्भ करके द्रोणाचार्यका दुर्योधनको पुन: संधिके लिये समझाना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  5.139.10 
त्वमुक्त: कुरुवृद्धेन मया च विदुरेण च।
वासुदेवेन च तथा श्रेयो नैवाभिमन्यसे॥ १०॥
 
 
अनुवाद
कुरुकुल के वृद्ध पुरुष भीष्मजी, मैंने, विदुरजी ने और भगवान श्रीकृष्ण ने भी आपसे आपके कल्याण की बात कही है; तथापि आप उसे स्वीकार नहीं कर रहे हैं॥10॥
 
Bhishmaji, the old man of Kurukula, I, Vidurji and Lord Shri Krishna have also told you about your welfare; However, you are not accepting it. 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)