vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 5: उद्योग पर्व
»
अध्याय 139: भीष्मसे वार्तालाप आरम्भ करके द्रोणाचार्यका दुर्योधनको पुन: संधिके लिये समझाना
»
श्लोक 10
श्लोक
5.139.10
त्वमुक्त: कुरुवृद्धेन मया च विदुरेण च।
वासुदेवेन च तथा श्रेयो नैवाभिमन्यसे॥ १०॥
अनुवाद
कुरुकुल के वृद्ध पुरुष भीष्मजी, मैंने, विदुरजी ने और भगवान श्रीकृष्ण ने भी आपसे आपके कल्याण की बात कही है; तथापि आप उसे स्वीकार नहीं कर रहे हैं॥10॥
Bhishmaji, the old man of Kurukula, I, Vidurji and Lord Shri Krishna have also told you about your welfare; However, you are not accepting it. 10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×