श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 138: भीष्म और द्रोणका दुर्योधनको समझाना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  5.138.26 
न चेत् करिष्यसि वच: सुहृदामरिकर्शन।
तप्स्यसे वाहिनीं दृष्ट्वा पार्थबाणप्रपीडिताम्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
हे शत्रु! यदि तुम अपने मित्रों की बात नहीं मानोगे, तो अपनी सेना को अर्जुन के बाणों से अत्यन्त पीड़ित देखकर पछताओगे॥26॥
 
Enemy! If you do not listen to the words of your friends, you will regret seeing your army suffering greatly from Arjuna's arrows. 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)