श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 137: कुन्तीका पाण्डवोंके लिये संदेश देना और श्रीकृष्णका उनसे विदा लेकर उपप्लव्य नगरमें जाना  »  श्लोक 12-13
 
 
श्लोक  5.137.12-13 
सर्वधर्मविशेषज्ञां स्नुषां पाण्डोर्महात्मन:।
ब्रूया माधव कल्याणीं कृष्ण कृष्णां यशस्विनीम्॥ १२॥
युक्तमेतन्महाभागे कुले जाते यशस्विनि।
यन्मे पुत्रेषु सर्वेषु यथावत् त्वमवर्तिथा:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
माधव! श्रीकृष्ण! आप महात्मा पाण्डु की पुत्रवधू, जो सब धर्मों की विशेष ज्ञाता हैं, सुविख्यात एवं यशस्वी द्रौपदी से कहिए - 'पुत्री! तुम्हारा जन्म अत्यन्त सौभाग्यशाली एवं यशस्वी कुल में हुआ है। तुमने मेरे सभी पुत्रों के साथ धर्मानुसार यथोचित व्यवहार किया है, यह तुम्हारे ही योग्य है।' 12-13॥
 
Madhav! Sri Krishna! You tell Draupadi, the well-known and renowned Draupadi, the daughter-in-law of Mahatma Pandu, who is especially knowledgeable about all religions – 'Daughter! You were born in a very fortunate and successful family. You have behaved appropriately with all my sons as per religion, this is worthy of you only. 12-13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)