श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 134: विदुलाका अपने पुत्रको युद्धके लिये उत्साहित करना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  5.134.2 
यो हि तेजो यथाशक्ति न दर्शयति विक्रमात्।
क्षत्रियो जीविताकाङ्क्षी स्तेन इत्येव तं विदु:॥ २॥
 
 
अनुवाद
जो क्षत्रिय प्राणों के लोभ से अपनी योग्यता के अनुसार वीरता नहीं दिखाता, उसे सब लोग चोर समझते हैं ॥2॥
 
A Kshatriya who, due to greed for life, does not display his valour to the best of his abilities is considered a thief by everyone. ॥2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)