श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 133: कुन्तीके द्वारा विदुलोपाख्यानका आरम्भ, विदुलाका रणभूमिसे भागकर आये हुए अपने पुत्रको कड़ी फटकार देकर पुन: युद्धके लिये उत्साहित करना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  5.133.9 
सुपूरा वै कुनदिका सुपूरो मूषिकाञ्जलि:।
सुसंतोष: कापुरुष: स्वल्पकेनैव तुष्यति॥ ९॥
 
 
अनुवाद
जैसे छोटी नदी थोड़े से जल से भर जाती है और चूहा थोड़े से अन्न से तृप्त हो जाता है, वैसे ही कायर को संतुष्ट करना सरल है; वह थोड़े से ही संतुष्ट हो जाता है॥9॥
 
Just as a small river gets filled with a little water and a mouse gets filled with just a little grain, similarly it is easy to satisfy a coward; he gets satisfied with just a little.॥ 9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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