Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.133.39: पुत्र ने कहा - माँ ! यदि तुम मुझे न देखोगी, तो सारा संसार पाकर भी तुम्हें क्या सुख मिलेगा ? यदि मैं न रहूँ, तो तुम्हें आभूषणों की क्या आवश्यकता रहेगी ? तुम्हें सभी प्रकार के सुखों और जीवन से क्या प्रयोजन होगा ?॥39॥ | mahabharat अध्याय 5.133: कुन्तीके द्वारा विदुलोपाख्यानका आरम्भ, विदुलाका रणभूमिसे भागकर आये हुए अपने पुत्रको कड़ी फटकार देकर पुन: युद्धके लिये उत्साहित करना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पुत्र उवाच
किं नु ते मामपश्यन्त्या: पृथिव्या अपि सर्वया।
किमाभरणकृत्यं ते किं भोगैर्जीवितेन वा॥ ३९॥
अनुवाद
पुत्र ने कहा - माँ ! यदि तुम मुझे न देखोगी, तो सारा संसार पाकर भी तुम्हें क्या सुख मिलेगा ? यदि मैं न रहूँ, तो तुम्हें आभूषणों की क्या आवश्यकता रहेगी ? तुम्हें सभी प्रकार के सुखों और जीवन से क्या प्रयोजन होगा ?॥39॥
The son said - Mother! If you do not see me, what happiness will you get even if you get the whole world? If I am not here, what need will you have for ornaments? What purpose will you get from all kinds of pleasures and life?॥ 39॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥