श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 133: कुन्तीके द्वारा विदुलोपाख्यानका आरम्भ, विदुलाका रणभूमिसे भागकर आये हुए अपने पुत्रको कड़ी फटकार देकर पुन: युद्धके लिये उत्साहित करना  »  श्लोक 36-37h
 
 
श्लोक  5.133.36-37h 
शूरस्योर्जितसत्त्वस्य सिंहविक्रान्तचारिण:॥ ३६॥
दिष्टभावं गतस्यापि विषये मोदते प्रजा।
 
 
अनुवाद
यदि कोई उत्साह और उमंग से युक्त, वीर योद्धा और सिंह के समान पराक्रमी राजा दैवयोग से युद्ध में मारा जाए, तो भी उसके राज्य में प्रजा सुखी रहती है ॥36 1/2॥
 
If a king full of zeal and enthusiasm, a valiant warrior and as valiant as a lion, dies in a war by chance, even then the subjects in his kingdom remain happy. ॥ 36 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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