श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 133: कुन्तीके द्वारा विदुलोपाख्यानका आरम्भ, विदुलाका रणभूमिसे भागकर आये हुए अपने पुत्रको कड़ी फटकार देकर पुन: युद्धके लिये उत्साहित करना  »  श्लोक 28-29h
 
 
श्लोक  5.133.28-29h 
अवृत्त्यैव विपत्स्यामो वयं राष्ट्रात् प्रवासिता:॥ २८॥
सर्वकामरसैर्हीना: स्थानभ्रष्टा अकिंचना:।
 
 
अनुवाद
तुम्हारी कायरता के कारण जब हम इस राज्य से निर्वासित हो जाएँगे, तब हम सब इच्छित सुखों से वंचित हो जाएँगे, विस्थापित हो जाएँगे और जीविका के अभाव में निराश्रित होकर मर जाएँगे ॥28 1/2॥
 
Because of your cowardice, when we are exiled from this kingdom, we will be deprived of all the desired comforts, will be displaced and will die destitute for want of a livelihood. ॥28 1/2॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas