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mahabharat 5.133.21-22h: बेटा! धैर्य और स्वाभिमान रखो। अपनी शक्ति को पहचानो और इस वंश को बचाओ जो तुम्हारे कारण डूब रहा है। 21/2   |   mahabharat अध्याय 5.133: कुन्तीके द्वारा विदुलोपाख्यानका आरम्भ, विदुलाका रणभूमिसे भागकर आये हुए अपने पुत्रको कड़ी फटकार देकर पुन: युद्धके लिये उत्साहित करना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 133: कुन्तीके द्वारा विदुलोपाख्यानका आरम्भ, विदुलाका रणभूमिसे भागकर आये हुए अपने पुत्रको कड़ी फटकार देकर पुन: युद्धके लिये उत्साहित करना  »  श्लोक 21-22h
 
 
श्लोक  5.133.21-22h 
कुरु सत्त्वं च मानं च विद्धि पौरुषमात्मन:॥ २१॥
उद्भावय कुलं मग्नं त्वत्कृते स्वयमेव हि।
 
 
अनुवाद
बेटा! धैर्य और स्वाभिमान रखो। अपनी शक्ति को पहचानो और इस वंश को बचाओ जो तुम्हारे कारण डूब रहा है। 21/2
 
Son! Have patience and self-respect. Know your strength and save this dynasty which is sinking because of you. 21/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)